70 साल बाद बनेगा करवाचौथ पर ऐसा शुभ संयोग, पूजा विधि के साथ जानिए क्या नहीं करना है करवाचौथ के दिन
जयपुर करवाचौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है. इसमें महिलाएं दिनभर बिना कुछ खाए और पिए पूरे दिन व्रत रखती हैं. यह व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख- समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं. इस व्रत में शाम को चांद की पूजा करने के बाद व्रत को तोड़ा जाता है.इस बार 17 अक्टूबर को करवाचौथ का व्रत है जिसमें 70 साल के बाद बहुत ही शुभ संयोग बन रहा है. यह शुभ संयोग पहली बार करवाचौथ का व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओं के बेहद खास रहेगा. करवाचौथ व्रत रखते समय कुछ सावधानियां रखनी चाहिए.
70 साल बाद बनेगा करवाचौथ 2019 पर ये शुभ संयोग
इस बार 70 साल बाद रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग बन रहा है. जो शुभ फलदाई होगा.रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्याभामा योग बनेगा जो पहली बार करवाचौथ का व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत अच्छा रहेगा।,इस बार उपवास का समय 13 घंटे 56 मिनट का है.पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर महिलाएं शाम को चांद को अर्घ्य देकर व्रत तोड़ती हैं. इस बार चांद 8:18 बजे निकलेगा.
करवाचौथ पूजा-विधि
करवाचौथ पर दिनभर निर्जला व्रत रखकर शांयकाल में, प्रदोष एवं निशीथ काल के मध्य भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कुमार कार्तिकेय आदि देवताओं की षोडशोपचार विधि से पूजन करने के साथ-साथ सुहाग के वस्तुओं की भी पूजा की जाती है.
रात्रि के समय चंद्रमा का दर्शन करके यह मंत्र पढते हुए अर्घ्य दें, मंत्र है-
”सौम्यरूप महाभाग मंत्रराज द्विजोत्तम, मम पूर्वकृतं पापं औषधीश क्षमस्व मे.” अर्थात हे! मन को शीतलता पहुंचाने वाले, सौम्य स्वभाव वाले ब्राह्मणों में श्रेष्ठ, सभी मंत्रों एवं औषधियों के स्वामी चंद्रमा मेरे द्वारा पूर्व के जन्मों में किए गए पापों को क्षमा करें. मेरे परिवार में सुख शांति का वास रहे. चन्द्रमा का पूजन, दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही भोजन ग्रहण किया जाता है. इस दिन चंद्रमा रात्रि 08 बजकर 19 मिनट पर उदय होंगे.
क्या है पूजा की सामग्री और विधि
व्रत के दिन शाम को लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं, इस पर भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय, गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करते हैं. एक लोटे में जल भरकर उसके ऊपर श्रीफल रखकर कलावा बांध दें व दूसरा मिट्टी का टोंटीदार करवा लेकर उसमें गेहूं भरकर व ढक्कन में शक्कर भर दें, उसके ऊपर दक्षिणा रखें, रोली से करवे पर स्वास्तिक बनाएं. इसके बाद धूप, दीप, अक्षत व पुष्प चढाकर भगवान का पूजन करें, पूजा के उपरांत भक्तिपूर्वक हाथ में गेहूं के दाने लेकर चौथमाता की कथा का वाचन करें . उसके बाद रात्रि में चंद्रमा के उदय होने पर चंद्रदेव को अर्ध्य दें.
भूलकर भी करवा चौथ पर ना करें ये काम
करवा चौथ के दिन महिलाओं को कैंची, चाकू और सूई-धागे से दूर रखना चाहिए
करवा चौथ के दिन महिलाओं को सफेद चीजें जैसे सफेद कपड़े, सफेद चावल, दूध और दही का दान नहीं करना चाहिए
करवा चौथ पर काले रंग के कपड़े नहीं पहना चाहिए
करवा चौथ के दिन किसी को भी को कटु वचन नहीं बोलना चाहिए
करवा चौथ पर सुहाग से जुड़ी किसी भी तरह की कोई निशानी को नहीं फेंकना चाहिए