लोकतंत्र मजबूत बनाकर, भारत का उत्थान करें। जाति-धर्म की तोड़ दीवारें, आओ हम मतदान करें॥

लोकतंत्र मजबूत बनाकर, भारत का उत्थान करें।
जाति-धर्म की तोड़ दीवारें, आओ हम मतदान करें॥
हम एक लोकतांत्रिक देश के स्वतंत्र नागरिक है। लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत जितने अधिकार नागरिकों को मिलते हैं, उनमें सबसे बड़ा अधिकार है वोट देने का अधिकार। इस अधिकार को पाकर हम मतदाता कहलाता हैं। वही मतदाता जिसके पास यह ताकत है कि वो सरकार बना सकता है, सरकार गिरा सकता है और तो और स्वयं सरकार बन भी सकता हैं। देश के युवाओं की जिम्मेदारी बनती है कि वो अशिक्षित लोगों को वोट का महत्व बताकर उनको वोट देने के लिए बाध्य करे। लेकिन यह विडंबना है कि हमारे देश में वोट देने के दिन लोगों को जरूरी काम याद आने लग जाते हैं। कई लोग तो वोट देने के दिन अवकाश का फायदा उठाकर परिवार के साथ पिकनिक मनाने चले जाते हैं। कुछ लोग ऐसे भी है जो घर पर होने के बावजूद भी अपना वोट देने के लिए वोटिंग बूथ तक जाने में आलस करते हैं। इस तरह अजागरूक, उदासीन व आलसी मतदाताओं के भरोसे हमारे देश के चुनावों में कैसे सबकी भागीदारी सुनिश्चित हो सकेंगी? साथ ही एक तबका ऐसा भी है जो प्रत्याक्षी के गुण न देखकर धर्म, मजहब व जाति देखकर अपने वोट का प्रयोग करता हैं। यह कहते हुए बड़ी ग्लानि होती है कि वोटिंग के दिन लोग अपना वोट संकीर्ण स्वार्थ के चक्कर में बेच देते हैं। यही सब कारण है कि हमारे देश के चुनावों में से चुनकर आने वाले अधिकत्तर नेता दागी और अपराधी किस्म के होते हैं। जिन्हें सही से बोलना और लिखना भी नहीं आता, ऐसे लोग जो अयोग्य है, वे गलत तरीकों से जीतकर योग्य लोगों पर राज करते हैं।
अंततः हमें यह शपथ लेनी चाहिए कि हम किसी भी प्रलोभन में नहीं फंसते हुए अपने वोट का प्रयोग स्वविवेक के आधार पर पूर्ण निष्पक्षता एवं निष्ठा के साथ करेंगे। चलते-चलते, कवि अजातशत्रु की ये पंक्तियां-
ये गठबंधन की राजनीति है, ये ठगबंधन की राजनीति है,
दीया कहीं का कहीं की बाती है, अरे ! ऐसे थोड़ी ज्योत जलाई जाती है !

आखिर मतदान क्यों करें
श्रीमद भगवत गीता के श्लोक में मनुष्य जीवन की हर समस्या का हल छिपा है| गीता के 18 अध्याय और 700 गीता श्लोक में कर्म, धर्म, कर्मफल, जन्म, मृत्यु, सत्य, असत्य आदि जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर मौजूद हैं|
श्री कृष्ण के इन्हीं उपदेशों को “भगवत गीता” नामक ग्रंथ में संकलित किया गया है|

1.कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
अर्थ – श्री कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन, कर्म करना तुम्हारा अधिकार है परन्तु फल की इच्छा करना तुम्हारा अधिकार नहीं है| कर्म करो और फल की इच्छा मत करो अर्थात फल की इच्छा किये बिना कर्म करो क्यूंकि फल देना मेरा काम है|
मतदान क्यों करें –> मतदान एकमात्र ऐसा कर्म है जिससे देश की जनता स्वयं अपने देश का विकास निर्धारित कर सकती है।
२.परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम्।धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥
अर्थ – श्री कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन, साधू और संत पुरुषों की रक्षा के लिये, दुष्कर्मियों के विनाश के लिये और धर्म की स्थापना हेतु मैं युगों युगों से धरती पर जन्म लेता आया हूँ|
मतदान क्यों करें –> आज हमारे देश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं इनको रोकने के लिए एक अच्छी सरकार किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए विशेष योजनाएं बनाती हैं लोगों के मतदाता जागरूकता की वजह से हमारे देश में हो रहे भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए एक अच्छा नेता ही सहयोग प्रदान करता है और हमारे देश से भ्रष्टाचार कुछ हद तक कम होता है इसलिए हमें मतदाता जागरूकता अपनाना चाहिए.
3.गुरूनहत्वा हि महानुभवान श्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके |हत्वार्थकामांस्तु गुरुनिहैव भुञ्जीय भोगान्रुधिरप्रदिग्धान् ||

अर्थ – महाभारत के युद्ध के समय जब अर्जुन के सामने उनके सगे सम्बन्धी और गुरुजन खड़े होते हैं तो अर्जुन दुःखी होकर श्री कृष्ण से कहते हैं कि अपने महान गुरुओं को मारकर जीने से तो अच्छा है कि भीख मांगकर जीवन जी लिया जाये| भले ही वह लालचवश बुराई का साथ दे रहे हैं लेकिन वो हैं तो मेरे गुरु ही, उनका वध करके अगर मैं कुछ हासिल भी कर लूंगा तो वह सब उनके रक्त से ही सना होगा|
मतदान क्यों करें –> इस मतदान के महत्व को समझें कि मतदान देकर हम हमारे देश की सरकार बनाते हैं जो हम पर राज करती है हम एक ऐसे नेता को चुने जो वास्तव में हमारे लिए कुछ अच्छा करें,जो हमारे लिए हितकारी योजना बनाएं. आज हमारे देश में चुनावों को लेकर बहुत सारी दुविधाएं हैं बच्चों, नौजवानों को बहला फुसलाकर उनसे वोट खरीदे जाते हैं और लोग सिर्फ थोड़े से लालच के लिए अपने जीवन को अंधकार में डाल देते हैं हम सभी को मतदाता जागरूकता दिवस को मनाते हुए अपने देश के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए

4.न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरियो यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयु: |
यानेव हत्वा न जिजीविषाम- स्तेSवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः ||

अर्थ – अर्जुन कहते हैं कि मुझे तो यह भी नहीं पता कि क्या उचित है और क्या नहीं – हम उनसे जीतना चाहते हैं या उनके द्वारा जीते जाना चाहते हैं| धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हम कभी जीना नहीं चाहेंगे फिर भी वह सब युद्धभूमि में हमारे सामने खड़े हैं|
मतदान क्यों करें –अक्सर चुनावों में कम मतदान होने से भ्रष्ट नेता चुनकर आता है और आगे वह भ्रष्ट बन कर ही काम करता है. ऐसे भ्रष्ट नेताओं पर दबाव डालने के लिए अधिक से अधिक मतदान करने की आवश्यकता है.|यही उचित हैं बाकी अनुचित

5.कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः,पृच्छामि त्वां धर्म सम्मूढचेताः |यच्छ्रेयः स्यान्निश्र्चितं ब्रूहि तन्मे
शिष्यस्तेSहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम् ||

अर्थ – अर्जुन श्री कृष्ण से कहते हैं कि मैं अपनी कृपण दुर्बलता के कारण अपना धैर्य खोने लगा हूँ, मैं अपने कर्तव्यों को भूल रहा हूँ| अब आप भी मुझे उचित बतायें जो मेरे लिए श्रेष्ठ हो| अब मैं आपका शिष्य हूँ और आपकी शरण में आया हुआ हूँ| कृपया मुझे उपदेश दीजिये|
मतदान क्यों करें –>हम सभी को अपने मतों का प्रयोग करके चुनाव को शत् प्रतिशत बदलने का प्रयास करना चाहिए. जिस पार्टी का जो नेता आप चाहते हैं उसे आप वोट डालिये. वे सभी नेता देश के नागरिक हैं और चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त हैं. इसलिए उस क्षण तक वे जनता के प्रतिनिधि हैं. उन पर किसी प्रकार का आरोप या प्रत्यारोप नहीं लगा सकते.

6.न हि प्रपश्यामि ममापनुद्या-द्यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम् |अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धंराज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम् ||

अर्थ – अर्जुन कहते हैं कि मेरे प्राण और इन्द्रियों को सूखा देने वाले इस शोक से निकलने का मुझे कोई साधन नहीं दिख रहा है| स्वर्ग पर जैसे देवताओं का वास है ठीक वैसे ही धन सम्पदा से संपन्न धरती का राजपाट प्राप्त करके भी मैं इस शोक से मुक्ति नहीं पा सकूंगा|
मतदान क्यों करें –> आपका कीमती वोट किसी भी नेता का मूल्यांकन कर सकता है. जो पार्टी, जो नेता आप चुनेंगे वो जीत कर आएगा और यदि शत् प्रतिशत वोटिंग की जाती है तो उस जीते हुए प्रतिनिधि की सोच बदल सकती है और वह हर क्षेत्र के हर व्यक्ति के लिए काम कर सकता है, जैसे कि – बिजली, पानी, सुरक्षा, शिक्षा, पेंशन, बाग़-बगीचे, सड़कें, आदि-आदि.

7.योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय |सिद्धयसिद्धयोः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ||
अर्थ – श्री कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन सफलता और असफलता की आसक्ति को त्यागकर सम्पूर्ण भाव से समभाव होकर अपने कर्म को करो| यही समता की भावना योग कहलाती है|
मतदान क्यों करें –> प्रत्येक मतदाता को चाहिए की चुनाव प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण समझकर चुनाव के दिन घर में ही रहने का प्रयास न करें. अपितु परिवार के साथ घर के बाहर निकलकर अपना कीमती वोट डालें और चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाइये.

8.यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति |तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च ||
अर्थ – श्री कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन जब तुम्हारी बुद्धि इस मोहमाया के घने जंगल को पार कर जाएगी तब सुना हुआ या सुनने योग्य सब कुछ से तुम विरक्त हो जाओगे|
मतदान क्यों करें –> मतदान केवल एक अधिकार नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। मतदान एक आध्यात्मिक कृत्य है क्योंकि उन व्यक्तियों पर अपनी राय व्यक्त करने के विकल्प का उपयोग करके, जिनको शासन की शक्तियों को ग्रहण करना चाहिए, आप अच्छे विश्वास में ऐसे व्यक्ति को आपके और दूसरों के जीवन को बदलने की शक्ति से संपन्न कर रहे हैं। कोई आध्यात्मिक व्यक्ति अध्यात्म में निहित मार्ग के साथ-साथ दूसरों को परेशान किए बिना अपनी सांसारिक जिम्मेदारियों को अंजाम देने का मार्ग भी प्राप्त कर सकता है। शायद यही तात्पर्य था जब कृष्ण ने हताश अर्जुन को कार्रवाई का योग उस समय समझाया जब उसने युद्ध के मैदान से चले जाने का फैसला किया था।

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