देवी उपासना करने वालों के लिए खास रहेंगे ये 9 दिन, नवरात्र के दौरान बनेंगे 8 शुभ योग

देवी उपासना करने वालों के लिए खास रहेंगे ये 9 दिन, नवरात्र के दौरान बनेंगे 8 शुभ योग,
2 दिन मनाई जाएगी श्रीराम नवमी
इस बार चैत्र नवरात्र पूरे 9 दिन की रहेगी, यानी तिथियों का क्षय इस बार नहीं होगा। साथ ही इस नवरात्र में अनेक शुभ योग भी बन रहे हैं। ज्योतिषियों के अनुसार नवरात्र में कार्यसिद्धि, अर्थसिद्धि, पद-प्रतिष्ठा के लिए देवी मंदिरों में विशेष अनुष्ठान कराए जाएंगे।

14 अप्रैल को होगा नवरात्र का समापन
नवरात्र में बनेगें अनेक शुभ योग
6 अप्रैल से शुरू होने वाले चैत्र नवरात्र में पांच सर्वार्थ सिद्धि, दो रवि योग और रवि पुष्य योग का संयोग बन रहा है। श्रीमद् देवी भागवत व देवी ग्रंथों के अनुसार इस तरह के संयोग कम ही बनते हैं। इसलिए यह नवरात्र देवी साधकों के लिए खास रहेगी। नवरात्र का समापन 14 अप्रैल को होगा।

2 दिन मनाई जाएगी श्रीराम नवमी
श्रीराम नवमी स्मार्त मतानुसार 13 अप्रैल को रहेगी। इस दिन सुबह 11.41 बजे तक अष्टमी है और इसके बाद नवमी शुरू हो जाएगी। इस मत में मध्याह्न व्यापिनी नवमी को श्रीराम नवमी मानते हैं। जबकि वैष्णव मत में उदयकाल की तिथि मानी जाती है। 14 अप्रैल को सुबह 9.35 बजे तक नवमी होने से इस मत के लोग 14 अप्रैल को नवमी मनाएंगे।
इस बार की चैत्र नवरात्रि 6 अप्रैल से शुरू हो रही है. कहा जा रहा है कि इस बार यह शुभ समय कई श्रेष्ठ योगों के साथ आ रहा है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चैत्र नवरात्र के 9 दिनों में पांच बार सवार्थ सिद्धि और दो बार रवि योग आएगा. इसके साथ ही इस नवरात्र पुष्य नक्षत्र का संयोग भी बनता नजर आ रहा है जो काफी शुभ माना जाता है.

किस दिन बनेगा कौन-सा शुभ योग?
7 अप्रैल- द्वितीया के साथ सर्वार्थ सिद्धि (शुभ)

8 अप्रैल- तृतीया के साथ रवि योग (कार्य सिद्धि)
9 अप्रैल- चतुर्थी के साथ सर्वार्थ सिद्धि (भूमि, भवन खरीदी)
10 अप्रैल- पंचमी के साथ सर्वार्थ सिद्धि (लक्ष्मी पंचमी)
11 अप्रैल- छठ के साथ रवि योग (संतान सुरक्षा)
12 अप्रैल- सप्तमी के साथ सर्वार्थ सिद्धि(नए संबंध चर्चा)
13 अप्रैल- अष्टमी पर कुलदेवी पूजन (स्मार्त मतानुसार नवमी)
14 अप्रैल- नवमी के साथ रवि पुष्य व सर्वार्थ सिद्धि (वैष्णव मतानुसार सुबह 9.37 तक नवमी)

रेवती नक्षत्र के साथ होगी नवरात्रि की शुरुआत
इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत रेवती नक्षत्र के साथ हो रही है. रेवती नक्षत्र का योग उदय काल में योग साधना और सिद्धि नें पांच गुना अधिक शुभफल प्रदान करेगा. धर्म शास्त्री की दृष्टि से इन 9 दिनों के त्योहार में पांच बार सर्वार्थसिद्धि और दो बार रवियोग पड़ने का संयोग काफी श्रेष्ठ माना जा रहा है. माना जाता है कि ऐसे योग बनते हैं तो देवी साधना का विशेष फल प्राप्त होता है. कहा जा रहा है कि यह नवरात्रि धन और धर्म की वृद्धि के लिए खास रहेगा.

7 अप्रैल को पड़ेगा सर्वार्थसिद्धि योग
चैत्र नवरात्र के शुरु होने के बाद 7 अप्रैल यानी द्वितीय तिथि को सर्वार्थ सिद्धि योग ( लक्ष्मी पंचमी) होगी. वहीं गुरुवार 11 अप्रैल को पष्ठी तिथि रवियोग फिर से होगा. शुक्रवार 12 अप्रैल को सप्तमी तिथि सर्वार्थसिद्धि योग होगा. वहीं शनिवार 13 अप्रैल को महाअष्टमी के सुबह 11 बजकर 42 मिनट के बाज नवमी तिथि स्मार्त मतानुसार योग होगा.

रविवार 14 अप्रैल को नवमी वैष्णव मतानुसार महानवमी रवीपुष्य नक्षत्र और सर्वार्थसिद्धि योग सुबह 9 बजकर 37 मिनट तक होगा. बता दें कि पंचक का पांचवा नक्षत्र कहे जाने वाले रेवती नक्षत्र का शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से एक घंटे तक स्पर्श होना, इसके साथ ही सुबह होने से करीब 45 मिनट तक रहना तंत्र साधना की नजर में सर्वोत्तम माना गया है. नक्षत्र सिद्धांत की नजर से देखें तो रेवती नक्षत्र का स्वामी पुषा है, जो ऋग्वेद के सभी देवताओं में से एक हैं.

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

रेवती नक्षत्र जो कि पंचक नक्षत्रों में से एक है, कल सुबह 07 बजकर 22 मिनट तक रहेगा, लेकिन वैधृति योग रात 09 बजकर 47 मिनट तक चलेगा | वैधृति योग में घट स्थापना वर्जित है | प्रतिपदा तिथि, उदया तिथि 6 अप्रैल से ही मान्य है | अत: चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा कल शनिवार 6 अप्रैल, 2019 को पूरे दिन मान्य रहेगी और वैधृति योग रात्रि 09 बजकर 47 मिनट तक रहेगा | अस्तु, पूरे दिन घट स्थापना का मुहर्त नहीं है, लेकिन नित्य ही सूर्य जब अपने चरम पर होता है, तो सभी कुछ अस्त हो जाता है और सूर्य के आगे सभी कुछ प्रभावहीन हो जाता है। मध्याह्न के इस मुहूर्त को अभिजित मुहूर्त कहते हैं।

इस समय कलश स्थापना का श्रेष्ठ मुहूर्त
6 अप्रैल को यह अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा | अस्तु, इस बार नवरात्र की कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त में करना श्रेयष्कर है | लिहाजा, सारी शंका छोड़कर अभिजित मुहूर्त में, यानी दोपहर 12:04 से 12:55 के बीच अपने घट या कलश की स्थापना करें।

नवरात्रि यानि मां की आराधना के पावन नौ दिन। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है, यह तो आप जानते हैं। लेकिन आराधना के इन नौ दिनों में 9 अलग-अलग रंगों का भी शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। जानिए कौन से हैं नवरात्रिो के यह 9 रंग…
1 पहला दिन – नवरात्रिव का पहला दिन मां शैलपुत्री की आराधना का दिन होता है। मां शैलपुत्री का पसंदीदा रंग लाल है, जो कि उल्लास, साहस और शक्ति का रंग माना जाता है। इस दिन लाल रंग का प्रयोग करने पर मां शैलपुत्री शीघ्र प्रसन्न होकर निर्णय क्षमता में वृद्धि करती हैं और इच्छिोत फल प्रदान करती है।
2 दूसरा दिन – नवरात्रि् का दूसरा दिन, मां ब्रम्हचारिणी की आराधना के लिए विशेष दिन होता है। मां ब्रम्हचारिणी, कुंडलिनी जागरण हेतु शक्ति प्रदान करती हैं। मां ब्रम्हचारिणी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। अत: नवरात्रिल के दूसरे दिन पीले रंग के वस्त्रादि का प्रयोग कर मां की आराधना करना शुभ होता है।
3 तीसरा दिन – तृतीयं चंद्रघंटेती, अर्थात नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। मां चंद्रघंटा की आराधना में हरे रंग का विशेष महत्व है। इस दिन हरे रंग का प्रयोग कर मां की कृपा एवं सुख शांति प्राप्त की जा सकती है।
4 चौथा दिन – मां दुर्गा के कुष्मांडा स्वरूप का पूजन नवरात्रिा के चौथे दिन किया जाता है। रोगों को दूर कर, धन, यश की प्राप्ति के लिए सिलेटी रं से आप मां कुष्मांडा को प्रसन्न कर सकते हैं।

5 पांचवा दिन – नवरात्रिी का पांचवा दिन मां स्कंदमाता की आराधना के लिए समर्पित है। मां स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी है, अत: इनका पसंदीदा रंग भी तेज से परिपूर्ण अर्थात नारंगी है। इस दिन नारंगी रंग का प्रयोग शुभ फल प्रदान करता है।
6 छठा दिन – नवरात्रि् का छठा दिन यानि मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की आराधना का दिन। ऋषि कात्यायन की पुत्री मां कात्यायनी को सफेद रंग प्रिय है, जो शांति का प्रतीक है। इस दिन विशेष रूप से सफेद रंग का प्रयोग शुभ रहेगा।
7 सप्तमी – सप्तमी तिथि को मां कलरात्रिह की आराधना की जाती है। मां कालरात्रि का पसंदीदा रंग गुलाबी है, अत: मां दुर्गा के इस स्वरूप के पूजन में गुलाबी रंग का प्रयोग शुभ होता है। इस दिन गुलाबी वस्त्र धारण करें।
8 अष्टमी – नवरात्रिम की अष्टमी तिथि, महागौरी का समर्पित है। मां महागौरी भक्तों में प्रसन्नता का संचार करती हैं। इस दिन हल्का नीला या आसमानी रंग का प्रयोग बेहद शुभ माना जाता है, जो असीम शांति प्रदान करता है।
9 नवमी – नवरात्रि के नौंवे दिन, मां दुर्गा के सिद्धीदात्री स्वरूप का पूजन होता है। मां सिद्धीदात्री के पूजन में भी आप हल्के नीले रंग का उपयोग कर सकते हैं। चंद्रमा की पूजा के लिए यह सर्वोत्तम दिन है।

नवरात्रि में 9 दिन के यह 9 प्रसाद?
मां दुर्गा को 9 दिन विशेष प्रसाद चढ़ते हैं। हर दिन का प्रसाद/भोग निश्चित है। पुराणों के अनुसार दिन के अनुसार भोग लगाने से मां तत्काल प्रसन्न होती है।
प्रथम नवरात्रि के दिन मां के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करने से आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है तथा शरीर निरोगी रहता है।
दूसरे नवरात्रि के दिन मां को शक्कर का भोग लगाएं व घर में सभी सदस्यों को दें। इससे आयु वृद्धि होती है।
तृतीय नवरात्रि के दिन दूध या दूध से बनी मिठाई खीर का भोग मां को लगाकर ब्राह्मण को दान करें। इससे दुखों की मुक्ति होकर परम आनंद की प्राप्ति होती है।
मां दुर्गा को चौथी नवरात्रि के दिन मालपुए का भोग लगाएं। और मंदिर के ब्राह्मण को दान दें। जिससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय शक्ति बढ़ती है।
नवरात्रि के पांचवें दिन मां को केले का नैवैद्य चढ़ाने से शरीर स्वस्थ रहता है।
छठवीं नवरात्रि के दिन मां को शहद का भोग लगाएं। इससे आकर्षण में प्रबल वृद्धि होगी।
सातवें नवरात्रि पर मां को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाने व उसे ब्राह्मण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है एवं आकस्मिक आने वाले संकटों से रक्षा भी होती है।
नवरात्रि के आठवें दिन माता रानी को नारियल का भोग लगाएं व नारियल का दान कर दें। इससे संतान संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
नवरात्रि की नवमी के दिन तिल का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान दें। इससे मृत्यु भय से राहत मिलेगी। साथ ही अनहोनी घटनाओं से बचाव भी होगा।

इस बार नवरात्रि पूजन करें राशि अनुसार

* इन नौ दिनों में मेष व वृश्चिक राशि व लग्न वाले लाल पुष्पों को अर्पित कर लाल चंदन की माला से मंत्रों का जाप करें। नैवेद्य में गुड़, लाल रंग की मिठाई चढ़ा सकते है। नवार्ण मंत्र इनके लिए लाभदायी रहेगा।

* वृषभ व तुला राशि व लग्न वाले सफेद चंदन या स्फटिक की माला से कोई भी दुर्गा जी का मंत्र जप कर नैवेद्य में सफेद बर्फी या मिश्री का भोग लगा सकते हैं।

* मिथुन व कन्या राशि व लग्न वाले तुलसी की माला से जप कर गायत्री दुर्गा मंत्रों का जाप कर सकते हैं। नैवेद्य में खीर का भोग लगाएं।

* कर्क राशि व लग्न वाले सफेद चंदन या स्फटिक की माला से जप कर नैवेद्य में दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
* सिंह राशि व लग्न वाले गुलाबी रत्न से बनी माला का प्रयोग व नैवेद्य में कोई भी मिठाई अर्पण कर सकते हैं।

* धनु व मीन राशि व लग्न वालों के लिए हल्दी की माला से बगुलामुखी या दुर्गा जी का कोई भी मंत्र से जप ध्यान कर लाभ पा सकते है। नैवेद्य हेतु पीली मिठाई व केले चढ़ाएं।

* मकर व कुंभ राशि व लग्न वाले नीले पुष्प व नीलमणि की माला से जाप कर नैवेद्य में उड़द से बनी मिठाई या हलवा चढ़ाएं।

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