राहु और केतु ग्रह करेंगे 7 मार्च को राशि परिवर्तन

राहु और केतु ग्रह करेंगे 7 मार्च को राशि परिवर्तन
-प्रदेश व देश के विकास में सहायक होगा तो सत्ता पक्ष में बढेंगी बेचैनी
जयपुर
18 माह बाद 7 मार्च को राहु और केतु ग्रह अपनी राशि परिवर्तन करेंगे। राहु कर्क व केतु मकर राशि छोड़कर अपनी उच्च राशि मिथुन व धनु राशि में प्रवेश करेंगे। राहु, केतु का परिवर्तन विभिन्न राशियों के जातकों पर अलग-अलग प्रभाव डालेगा। परिवर्तन प्रदेश व देश के विकास में सहायक होगा तो सत्ता पक्ष में बेचैनी बढ़ाएगी। राहु में जहां शनि के गुण होते है तो केतु में मंगल के गुण। पं. अक्षय शास्त्री गौत्तम ने बताया कि 7 मार्च की सुबह राहु-केतु राशि परिवर्तन करेंगे। इसके बाद 23 सितंबर 2020 तक 18 माह इन राशियों में रहेंगे। पौराणिक कथा में राहु को बिना धड़ का तो केतु को बिना सिर का बताया गया है। खगोलीय दृष्टि से यह भले ही ग्रह नही है। लेकिन ज्योतिष में इनका अन्य ग्रहों के बराबर महत्व है। इनकी चाल वक्री होती है। लोगों की जन्म कुंडली में इन्हीं ग्रहों के कारण काल सर्प योग बनता है।
राशियों पर पड़ेगा प्रभाव
राहु
मेष: सम्मान बढ़ेगा, भाग्य वृद्धि
वृष: व्यय बढ़ेगा, यात्राएं अधिक होगी
मिथुन:मतिभ्रम, संघर्ष शत्रु वृद्धि
कर्क: उदर रोग धन व्यय
सिंह: शुभ लाभ कीर्ति
कन्या: शुभ पदोन्नति तबादला
तुला:कष्ट अपमान रोग
वृश्चिक: अशुभ कष्ट हानि
धनु: रोग व्याधि श्रम संघर्ष
मकर: उन्नति लाभ श्रम
कुंभ:संतान चिंता दौड़धूप और
मीन: नौकरी में परेशानी व कष्ट होगा।
केतु का प्रभाव
मेष: वाद विवाद कष्ट बाधा
वृष:रोग शोक हानि
मिथुन: तनाव पत्नीकष्ट उदर विकार
कर्क: उन्नति सफलता शुभ
सिंह: भ्रम उलझन श्रम
कन्या ऋण रोग अशांति
तुला: मान यश श्रम
वृश्चिक: धनहानि खिन्नता
धनु हानि पीड़ा भय
मकर विश्वासघात हानि रोग
कुंभ धनलाभ शुभ सम्मान और
मीन: लाभ सफलता साहस।
शांति के लिए यह करें उपाय
पं. राजकुमार चतुर्वेदी ने बताया कि राहु की शांति के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करें। सफेद चंदन का टीका लगाएं। देवी उपासना करें, अष्ट धातु का कड़ा पहने, नीले वस्त्र का दान करें। इसी प्रकार केतु की शाति के लिए गणेशजी की उपासना करें। श्री गणेश भगवान को दुर्वा अर्पित करें। लाल चंदन का टीका लगाएं। कंबल व छाता दान करें, गरीबों की सहायता करें। ऐसा करने से ग्रह दोष दूर हो जाएगा और अनेक बाधा दूर होगी। वहीं इस दौरान सभी जातकों को दान-पुण्य करना चाहिए। जिसमें साधु-संतों के साथ गरीबों को भोजन व वस्त्र दान करने के साथ गायों को हरा चारा खिलाना चाहिए।

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