2019 में मनाए जाने वाले बड़े त्योहारो में इस बार अजब संयाेग बना है। साल में मनाए जाने वाले 10 त्योहार सोमवार को ही आ रहे हैं, जिसकी शुरुआत मकर संक्रांति से हो चुकी है।
फरवरी में अमावस्या, मार्च में महाशिवरात्रि, अप्रैल में गणगौर तीज, जून में शनि जयंती, अगस्त में नागपंचमी, सितंबर में गणेशोत्सव, जलझूलनी एकादशी, अक्टूबर में शारदीय नवरात्र और गोवर्धन पूजा तक इसी वार में आ रही है। पंडितों का मानना है कि एक ही वार में आ रहे सभी त्योहार शुभता के सूचक हैं।
महाशिवरात्रि: (4 मार्च, सोमवार) – ये पर्व भगवान शिव से जुड़ा है और सोमवार भी शिवजी का ही दिन है, इसलिए इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया है। इस दिन सोमवार का महासंयोग बनने से उपासक काे मनोवांछित फल मिलता है।
गणगौर तीज: (8 अप्रैल, सोमवार) – ये पर्व माता पार्वती से संबंधित है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर तीज मनाया जाता है। इस दिन मां पार्वती की पूजा गणगौर माता के रूप में की जाती है। इसके साथ ही भगवान शिव की पूजा ईसरजी के रूप में की जाती है।
शनि जयंती: (3 जून, सोमवार) – ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्यायाधीश कहा गया है। शनि ही मनुष्यों को अच्छे-बुरे कामों का फल प्रदान करते हैं। इसलिए शनि पूजा के लिए ये दिन बहुत ही विशेष माना जाता है। पंडितों के अनुसार यह संयोग चार साल बाद आ रहा है।
नागपंचमी: (5 अगस्त, सोमवार) – ये पर्व सावन में मनाया जाता है। सावन भगवान शिव की आराधना का पर्व है व सर्प उनका आभूषण है। इसलिए इस दिन नागों की पूजा विशेष रूप से की जाती है। दक्षिण भारत में ऐसा ही त्योहार कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है।
गणेश उत्सव: (2 सितंबर, सोमवार) – हिंदू धर्म में भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। यानी किसी भी शुभ काम से पहले इनकी पूजा अनिवार्य रूप से की जाती है। गणेश उत्सव के पहले दिन श्रीगणेश की प्रतिमा घर-घर में स्थापित की जाती है।
जलझूलनी एकादशी: (9 सितंबर, साेमवार) : इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप की पूजा की जाती है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी पद्मा, परिवर्तिनी एकादशी और जलझूलनी एकादशी कहलाती है। इसका व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है।
शारदीय नवरात्र महानवमी: (7 अक्टूबर, सोमवार) : अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को शारदीय नवरात्र की शुरुआत होती है। इसकी नवमी तिथि विशेष होती है। ये नवरात्र का अंतिम दिन होता है। इस दिन सिद्धिदात्री मां की पूजा की जाती है।
गोवर्धन पूजा: (28 अक्टूबर, सोमवार)-ये पर्व दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन गाेवर्धन पर्वत और गाय की पूजा की जाती है।
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